Skip to main content

Posts

बेरोजगारी की समस्या

बेरोजगारी की समस्या  भारत में बेरोजगारी  की समस्या और समाधान  बेरोजगारी की समस्या एक अभिशाप  भारत में बेरोजगारी  क्यों ? बेरोजगारी  एक महाअभिशाप   भारत को स्वतंत्रता बड़ी मुश्किलों  के बाद मिली है और स्वतंत्रता के बाद भारत की ये कोशिश रही है कि  सबको रोजगार मिले परन्तु  भारत एक विकासशील देश है।  यहाँ पर अनेको समस्या देश के विकास में रोड़ा बनी  हुई है।  विकासशील देशो में सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की होती  है।   जैसे जैसे देश प्रगति करता जा रहा है बेरोजगारी के समस्या भी बढ़ रही है। ये समस्या भारत देश में कोढ़  का रोग बन गयी है। बेरोज़गारी  की समस्या देश के माथे पर एक कलंक का टीका  है बेरोजगारी से अभिप्राय है की योग्यता रखने के बाद भी किसी व्यक्ति को रोजगार नहीं मिलता है। भारत में बेरोजगारी कई तरह की पाई जाती है जैसे शिक्षित बेरोजगारी ,अशिक्षित बेरोजगारी ,अल्प  बेरोजगारी ,प्रछन्न बेरोजगारी। शिक्षित बेरोजगारी से अभिप्राय है की लोग पढ़े लिखे और अपने कार्य में कुश...
Recent posts

महंगाई की समस्या

महंगाई की समस्या  भारत देश में महंगाई की समस्या बहुत समस्या है। महंगाई का कारण  उपभोग्ता  वस्तुओं  की कमी या मुद्रास्फीति है। हमारे दैनिक जीवन में आवश्यक वस्तुओं की कमी कई बातों पर निर्भर करती है। इनके कई कारण  हो सकते है जैसे भरी वर्षा ,हिमपात, अल्पवर्षा, आकाल ,तूफ़ान , फसलों का रोग ,विपरीत मौसम ,ओले पड़ना,आदि। इसके आलावा कई कारण  तो ऐसे है जो मानव द्वारा निर्मित होते है। मानव अपने फायदे  के लिए आवशयक वस्तुओं का कृत्रिम अभाव पैदा कर देता है और उन वस्तुओं को ऊँचे दामों पर बेचता है। ऐसा कार्य आमतौर पर बड़े व्यापारी करते है। वे किसी वस्तु की जामखोरी कर के कृत्रिम अभाव  पैदा कर देते है फिर उस वस्तु को जरूरतमंदों को ऊँचे दामों पर बेच कर मुनाफ़ा  कमाते है। महंगाई की समस्या भारत में ही नहीं अपितु पूरे  विश्व में फैली हुई है।  पूरे  विश्व में ज्यादातर सरकारें लोकतांत्रिक सरकारें है जिसके कारण  चुनाव के समय बड़े बड़े व्यापारी बड़े बड़े दलों  को मोटा चंदा देते है और ये व्यापारी महंगाई बढ़ा कर आम जनता से पैसा वसूलती है। सरकारें भी...

भारतीय सिनेमा

भारतीय सिनेमा  भारतीय सिनेमा के सौ  साल  भारतीय सिनेमा ने सौ  साल का अपना सुहाना सफ़र  पूरा कर लिया है।  भारत के सबसे पहली फिल्म 3 मई 1913 को भारतीय फिल्म जगत के पितामह माने  जाने वाले दादा साहब फाल्के द्वारा बनी फिल्म 'राजा हरिश्चन्द्र 'प्रदर्शित हुई थी।  इसी फिल्म ने ही भारतीय फिल्म की नींव रखी थी। आरंभिक दस वर्षों  में केवल 91 फिल्में  ही बनी थी। वर्तमान में फिल्म उद्योग का चेहरा पूरी तरह से बदल गया है। अब तो हरसाल लगभग 1000 से ज्यादा फिल्मों  का निर्माण होता है। पहले के समय में महिलाओं  का फिल्मों  में काम करना बुरा माना जाता था। जब राजा हरिश्चंद फिल्म बनी तो महिला कलाकार की समस्या आई। किसी भी अच्छे परिवार में महिला का काम करना असंभव  था। सालुंके नाम के वेटर ने इस समस्या का समाधान किया ये वेटर स्त्री जैसे लगता था इसलिए तारामती नाम के पात्र को निभाने के लिए इस वेटर को रखा लिया गया। राजा हरिशचंद्र की भूमिका दत्तत्रेय ने की दूसरी महिला पात्र के लिए गणपत शिंदे ने भूमिका अदा  की। हरिश्चंद्र के बेटे की भूमि...

अनुशासन का महत्व

अनुशासन  अनुशासन का महत्व  अनुशासन ही जीवन को प्रगति की और ले जाता है  अनुशासन क्यों ? अनुशासन हमारे जीवन में क्यों आवश्यक है किसी भी व्यक्ति की जीवन में अनुशासन का बहुत महत्व है।  अनुशासन का मतलब परतन्त्र नहीं बल्कि नियमों के अनुसार जीवन को चलाना होता है। अनुशासन का मतलब ही किसी व्यक्ति को समय  परिस्थिति और स्थान के अनुरूप चलना है। बिना अनुशासन के जीवन ऐसा होता है मानो बिना अंकुश के हाथी। केवल अनुशासन ही किसी व्यक्ति को सफ़ल और उच्च दर्जे की जिंदगी दे सकता है।  अनुशासित व्यक्ति ही सफलता की शिखर को छू सकता है। केवल अनुशासन के द्वारा ही हम किसी भी स्थिति को नियंत्रित कर सकते है। किसी सफल व्यक्ति के जीवन का राज ही उसका अनुशासित जीवन है। केवल अनुशासन द्वारा ही हम अपने जीवन में आगे बढ़  कर अपने जीवन के लक्ष्य को पा सकते है।  अनुशासन के ढेरों  उदाहरण हमें प्रकृति से भी मिल जाते है जैसे सूरज का समय पर हमेशा पूरब दिशा में उगना और समय पर पश्चिम दिशा में छिप  जाना। चाँद का समय समय पर  अपनी कला बदलना। चाँद तारों  की अपनी गति...

परिश्रम ही सफलता की कुंजी है

परिश्रम ही सफलता की कुंजी है  भगवान ने मानव जीवन हमें इसलिए दिया है ताकि हम संसार में जो भी वस्तु  चाहे उसको परिश्रम द्वारा हासिल करे। मात्र इच्छा से हमे कोई ही वस्तु प्राप्त नहीं हो सकती है किसी भी वस्तु को प्राप्त करने के लिए हमें परिश्रम करना होता है। यदि लक्ष्य सही हो तो परिश्रम करके हमें इच्छित वस्तु की प्राप्ति हो सकती है।    संसार में कोई भी ऐसी वस्तु  नहीं बनी जिसको प्राप्त करने के लिए परिश्रम की आवश्यकता न हो। हम खाना भी अपना हाथ बढ़ा  कर उठाकर खाते  है और शरीर को चलाने  के लिए भोजन भी हम अपने दांतो से चबा कर देते है यानि परिश्रम करके ही भोजन का भोग करते है। परिश्रम के बिना मानव विकास हो नहीं सकता। यदि हम अपने जीवन में कुछ लक्ष्य प्राप्त करना चाहते है तो उसके लिए हमें परिश्रम करना पड़ेगा।     परिश्रम का महत्व तो आदि मानव भी समझ  गया था क्योकि  उसे भी भोजन प्राप्त करने के लिए भी कठोर परिश्रम द्वारा ही जानवरों  को मरने और उन्हें भूनकर खाने के लिए आग के लिए पत्थर का इस्तेमाल किया। परिश्रम द्वारा ही...

अच्छा स्वास्थ्य ही सबसे कीमती गहना है

अच्छा स्वास्थ्य ही सबसे कीमती गहना है  आज के दौर  की वयस्त  जीवनशैली में स्वस्थ रहना सबसे बड़ी जिम्मेवारी और चुनौती है। स्वस्थ रहना मनुष्य के लिए उतना ही जरुरी होता है जितना की शरीर पर गहना या जेब में  पैसा। यदि आप के पास अच्छा स्वास्थ्य है तो आप जीवन के सभी आनंद प्राप्त कर सकते है क्योकि  बीमार व्यक्ति चाहे कितना भी पैसे वाला हो या रसूक वाला वो जीवन के सभी आनंद लेने में असक्षम है। आप का खोई धन संपत्ति  फिर से वापस आ सकती है पर आप का स्वस्थ एक बार बिगड़ जाए तो उसे फिर से पुरानी स्थिति में लाना कठिन हो जाता है।    हम भागदौड़ वाले इस जीवन में हर काम करना जरुरी समझते है परन्तु ये भूल जाते है की हम जो भी काम करते है वो अपने लिए करते है। यदि हम अपने कार्यों में अपने खाने -पीने  का ध्यान नहीं रखेंगे तो हम बीमार पड़  जायेगे और हमने जिस खाने को पैसा कमाने के लिए छोड़ा था , हमारे बीमार पड़ने पर हम उस पैसे का आनंद नहीं प्राप्त कर सकते है। हमें हमेशा ये ध्यान रखना चाहिए की अच्छा स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।  यदि कोई गरीब है पर स्वस्थ है तो व...

भ्रष्टाचार भारत देश की एक बड़ी समस्या

भ्रष्टाचार भारत देश की एक बड़ी समस्या  भ्रष्टाचार शब्द का अर्थ है नीच या गिरा हुआ, जिसने अपना कर्तव्य छोड़ दिया हो , गिरा हुआ आचरण दूसरे शब्दों में कहे ऐसा कार्य जो अपने निजी स्वार्थ के लिए किया जाए जिसमे सिर्फ उसका हित  हो चाहे दूसरे को कितनी जान या माल की हानि हो, ऐसा कार्य जिसकी समाज ने कभी भी उससे अपेक्षा न की हो। आधुनिक भारत में ये शब्द ज्यादातर उन लोगों  के लिए करते है जो जनता को लूटते है जैसे नेता जो की देश की जनता के धन को अपने कब्जे में करते है , जामखोरों  के लिए जो खाने पीने  आदि रोजमर्रा की जरूरत के चीजों की कमी कर फिर उन्हें ऊँचे दामों पर बेच कर ज्यादा मुनाफ़ा  कमाते है, उन कारखानों के मालिकों के लिए जो गरीब मजदूर से ज्यादा काम ले कर कम पैसा देते है। हमारी इस नए  युग में भोगवादी मनोवृति को  भ्रष्टाचार की जननी  कहा जाता है।  आधुनिक दुनिया में भ्रष्टाचार के अलग अलग रूप होते है और इनके करने के तरीके भी अलग अलग होते है। जैसे दुकानदार अपने सामान में अलग तरीके  से मिलावट करते है जैसे कालीमिर्च में पपीते के बीज को मिलाना , द...