महंगाई की समस्या
भारत देश में महंगाई की समस्या बहुत समस्या है। महंगाई का कारण उपभोग्ता वस्तुओं की कमी या मुद्रास्फीति है। हमारे दैनिक जीवन में आवश्यक वस्तुओं की कमी कई बातों पर निर्भर करती है। इनके कई कारण हो सकते है जैसे भरी वर्षा ,हिमपात, अल्पवर्षा, आकाल ,तूफ़ान , फसलों का रोग ,विपरीत मौसम ,ओले पड़ना,आदि। इसके आलावा कई कारण तो ऐसे है जो मानव द्वारा निर्मित होते है। मानव अपने फायदे के लिए आवशयक वस्तुओं का कृत्रिम अभाव पैदा कर देता है और उन वस्तुओं को ऊँचे दामों पर बेचता है। ऐसा कार्य आमतौर पर बड़े व्यापारी करते है। वे किसी वस्तु की जामखोरी कर के कृत्रिम अभाव पैदा कर देते है फिर उस वस्तु को जरूरतमंदों को ऊँचे दामों पर बेच कर मुनाफ़ा कमाते है। महंगाई की समस्या भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में फैली हुई है।
पूरे विश्व में ज्यादातर सरकारें लोकतांत्रिक सरकारें है जिसके कारण चुनाव के समय बड़े बड़े व्यापारी बड़े बड़े दलों को मोटा चंदा देते है और ये व्यापारी महंगाई बढ़ा कर आम जनता से पैसा वसूलती है। सरकारें भी सिर्फ दिखाने के लिए लोगों के लिए बड़ी बड़ी घोषणायें करती है की वह दाम कम करने के लिए जनता की लिए उपाय कर रही है ,जब व्यापारियों के पैसे वसूल हो जाते है तो उन वस्तुओं के दाम कम हो जाते है। इस तरह लगता है कि महंगाई केवल लोगों की मज़बूरी बन गयी है क्योकि बड़े बड़े दलों को चुनाव जीतने के लिए बहुत सारे पैसों की आवश्यकता होती है और उनकी इस आवश्यकता को बड़े बड़े व्यापारी पूरा करते है बदले में ये व्यापारी सरकार से मनमाना काम करवाते है। यदि सरकार ईमानदार हो और दाम कम कराने की कोशिश करे तो दाम काम होते है।
महंगाई के बढ़ने का एक कारण भारत में उपभोग्ता संगठनों में सक्रियता नहीं है। जापान जैसे बड़े देश में एक बात लोग हमेशा करते है कि यदि उनके देश में किसी चीज के दाम है तो लोग वस्तुओं को इस्तेमाल करना छोड़ देते है इससे उन वस्तुओं की मांग कम हो जाती है और दाम कम हो जाते है। इसका एक उदहारण अमेरिका देश है जहाँ एक बार वहाँ के व्यापारियों ने बिना कारण मांस के दाम बढ़ा दिया परन्तु वहाँ पर उपभोग्ताओं के संगठन में एकता थी जिसके कारण किसी भी कई दिनों तक ने मांस नहीं ख़रीदा और जिसके कारण करोड़ों टन मांस बर्बाद हो गया इससे उत्पादक कीमत कम करने के लिए मजबूर हो गए और मांस की कीमत कम हो गयी। परन्तु हमारे देश में ऐसा कोई संगठन नहीं है यदि कोई आदमी गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठता है तो उस की आवाज दबा दी जाती है और लोग एकदूसरे का साथ नहीं देते है।
उत्पादन भी महंगाई बढ़ने का एक कारण बनता जा रहा है। एक समय था जब कार बनाने वाली बहुत कम कंपनियां थी लोगों को कार खरीदने के लिए काफी समय इंतजार करना पड़ता था जिसके कांरण कार को ब्लैक कीमत पर बेचा जाता था। आज कार बनाने की बहुतसारी कंपनियां बाज़ार में है पर कार कंपनियों के संगठन में एकता होने के कारण कार की कीमत लगभग एक जैसी है। सबसे बड़ी बात ये है कारों को बनाने वाले व्यापारियों के संगठन में एकता है और वह अपने दाम को तय करती है परन्तु हमारे उपभोगताओं में कोई संगठन नहीं है जिसके कारण वह किसी भी वस्तु का मानक मूल्य तय कर सके।
सरकार की शासन व्यवस्था तो केवल नाम की बनती जा रही है। विश्व में भारत चाहे सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश क्यों न हो परन्तु हमारी सरकार का उत्पादन पर कोई नियंत्रण नहीं है। जिसके कारण देश के किसानों को केवल घाटा पहुँचता है। जब भी कोई फसल आती है तो उसकी कीमत कम हो जाती है जिसके कारण किसानों को कम पैसे मिलते है। परन्तु जमाखोर व्यापारी इन फसलों को कम दामों पर खरीद कर रख लेता है फिर बाद में इन फसलों को ऊँचे दामों पर बेच कर पैसा कमाता है परन्तु भारत की ख़राब उत्पादन प्रणाली के कारण हमारा किसान गरीब ही रह जाता है।
जनसंख्या वृद्धि भी एक बहुत बड़ा महंगाई का कारण है। हमारे देश की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है ऐसी स्थिति में हमारे देश की जमीन तो नहीं बाद सकती है परन्तु वस्तुओं की कीमत जरूर बढ़ सकती है। जनसंख्या के कारण जरुरी वस्तुओं की कमी हो रही है। मकानों के किराये बढ़ना , खाद्यसामग्री के मूल्यों में वृद्धि ,सरकार द्वारा उपलब्ध सुविधाओं जैसे पानी ,बिजली आदि के मूल्यों में वृद्धि ,यातायात के साधन के किरायों में वृद्धि आदि पर काबू पाना नामुकिन हो गया है।
महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है अर्थशास्त्री कहते है कि देश विकास की और जा रहा है तो चीजों के दाम तो अपनेआप बढ़ेंगे ही। कीमतों का बढ़ना तो रुक नहीं सकता परन्तु यदि इसके साथ रोजगार के अवसर भी बाद जाए तो लोगों की आय में वृद्धि होगी और क्रयशीलता बढ़ेगी महंगाई पर नियंत्रण तभी संभव है जब सरकार के साथ देश का हर नागरिक आवश्यकता के अनुसार ही वस्तुओं का उपयोग करे ,कम खर्च में अधिक लाभ लेने की कोशिश करे। दिखावे की प्रवर्ति को त्यागना होगा। अनावशयक खरीदारी भी महंगाई को बढ़ावा देती है इसलिए केवल जरुरत के चीजों की खरीदारी करनी चाहिए। महंगाई के दानव से बचने के लिए हमें दृढ निश्चय की आवश्यकता है तभी हम इस महंगाई पर विजय प्राप्त कर सकते है।
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