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Showing posts from February, 2020

परिश्रम ही सफलता की कुंजी है

परिश्रम ही सफलता की कुंजी है  भगवान ने मानव जीवन हमें इसलिए दिया है ताकि हम संसार में जो भी वस्तु  चाहे उसको परिश्रम द्वारा हासिल करे। मात्र इच्छा से हमे कोई ही वस्तु प्राप्त नहीं हो सकती है किसी भी वस्तु को प्राप्त करने के लिए हमें परिश्रम करना होता है। यदि लक्ष्य सही हो तो परिश्रम करके हमें इच्छित वस्तु की प्राप्ति हो सकती है।    संसार में कोई भी ऐसी वस्तु  नहीं बनी जिसको प्राप्त करने के लिए परिश्रम की आवश्यकता न हो। हम खाना भी अपना हाथ बढ़ा  कर उठाकर खाते  है और शरीर को चलाने  के लिए भोजन भी हम अपने दांतो से चबा कर देते है यानि परिश्रम करके ही भोजन का भोग करते है। परिश्रम के बिना मानव विकास हो नहीं सकता। यदि हम अपने जीवन में कुछ लक्ष्य प्राप्त करना चाहते है तो उसके लिए हमें परिश्रम करना पड़ेगा।     परिश्रम का महत्व तो आदि मानव भी समझ  गया था क्योकि  उसे भी भोजन प्राप्त करने के लिए भी कठोर परिश्रम द्वारा ही जानवरों  को मरने और उन्हें भूनकर खाने के लिए आग के लिए पत्थर का इस्तेमाल किया। परिश्रम द्वारा ही...

अच्छा स्वास्थ्य ही सबसे कीमती गहना है

अच्छा स्वास्थ्य ही सबसे कीमती गहना है  आज के दौर  की वयस्त  जीवनशैली में स्वस्थ रहना सबसे बड़ी जिम्मेवारी और चुनौती है। स्वस्थ रहना मनुष्य के लिए उतना ही जरुरी होता है जितना की शरीर पर गहना या जेब में  पैसा। यदि आप के पास अच्छा स्वास्थ्य है तो आप जीवन के सभी आनंद प्राप्त कर सकते है क्योकि  बीमार व्यक्ति चाहे कितना भी पैसे वाला हो या रसूक वाला वो जीवन के सभी आनंद लेने में असक्षम है। आप का खोई धन संपत्ति  फिर से वापस आ सकती है पर आप का स्वस्थ एक बार बिगड़ जाए तो उसे फिर से पुरानी स्थिति में लाना कठिन हो जाता है।    हम भागदौड़ वाले इस जीवन में हर काम करना जरुरी समझते है परन्तु ये भूल जाते है की हम जो भी काम करते है वो अपने लिए करते है। यदि हम अपने कार्यों में अपने खाने -पीने  का ध्यान नहीं रखेंगे तो हम बीमार पड़  जायेगे और हमने जिस खाने को पैसा कमाने के लिए छोड़ा था , हमारे बीमार पड़ने पर हम उस पैसे का आनंद नहीं प्राप्त कर सकते है। हमें हमेशा ये ध्यान रखना चाहिए की अच्छा स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।  यदि कोई गरीब है पर स्वस्थ है तो व...

भ्रष्टाचार भारत देश की एक बड़ी समस्या

भ्रष्टाचार भारत देश की एक बड़ी समस्या  भ्रष्टाचार शब्द का अर्थ है नीच या गिरा हुआ, जिसने अपना कर्तव्य छोड़ दिया हो , गिरा हुआ आचरण दूसरे शब्दों में कहे ऐसा कार्य जो अपने निजी स्वार्थ के लिए किया जाए जिसमे सिर्फ उसका हित  हो चाहे दूसरे को कितनी जान या माल की हानि हो, ऐसा कार्य जिसकी समाज ने कभी भी उससे अपेक्षा न की हो। आधुनिक भारत में ये शब्द ज्यादातर उन लोगों  के लिए करते है जो जनता को लूटते है जैसे नेता जो की देश की जनता के धन को अपने कब्जे में करते है , जामखोरों  के लिए जो खाने पीने  आदि रोजमर्रा की जरूरत के चीजों की कमी कर फिर उन्हें ऊँचे दामों पर बेच कर ज्यादा मुनाफ़ा  कमाते है, उन कारखानों के मालिकों के लिए जो गरीब मजदूर से ज्यादा काम ले कर कम पैसा देते है। हमारी इस नए  युग में भोगवादी मनोवृति को  भ्रष्टाचार की जननी  कहा जाता है।  आधुनिक दुनिया में भ्रष्टाचार के अलग अलग रूप होते है और इनके करने के तरीके भी अलग अलग होते है। जैसे दुकानदार अपने सामान में अलग तरीके  से मिलावट करते है जैसे कालीमिर्च में पपीते के बीज को मिलाना , द...

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी   भारत एक ऐसा देश है जहाँ  के लोगो ने ऐसे महान  कार्य किये है जिसके कारण उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है और उनके द्वारा किये कार्यों   को पूरा विश्व याद करता है जिनमे से एक नाम  महात्मा गाँधी जी का  हैं  जो पूरे    विश्व  में विख्यात है।   विश्व में शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो महात्मा गाँधी जी के बारे में नहीं जानता होगा।  सभी लोग महात्मा गाँधी जी को बापू क़ह कर बुलाते है। इनके जैसा युग पुरुष सदियों बाद एक बार जनम लेता है इसलिए इन्हे युग पुरुष की उपाधि से नवाज़ा  गया है।  इनका जीवन आदर्श इसलिए माना जाता है क्योकि  ये केवल उपदेश ही नहीं देते थे बल्कि खुद कार्य करके उदहारण देते थे।  इन्होने देश को आज़ाद  करने का वो रास्ता चुना वो  लोगो के लिए एक आश्चर्य से भरा हुआ है क्योकि अहिंसा के मार्ग पर चलना बहुत कठिन होता है परन्तु गाँधी जी ने इसी मार्ग पर चल कर देश को आज़ादी दिलाई थी। महात्मा गाँधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था। इन...