भ्रष्टाचार भारत देश की एक बड़ी समस्या
भ्रष्टाचार शब्द का अर्थ है नीच या गिरा हुआ, जिसने अपना कर्तव्य छोड़ दिया हो , गिरा हुआ आचरण दूसरे शब्दों में कहे ऐसा कार्य जो अपने निजी स्वार्थ के लिए किया जाए जिसमे सिर्फ उसका हित हो चाहे दूसरे को कितनी जान या माल की हानि हो, ऐसा कार्य जिसकी समाज ने कभी भी उससे अपेक्षा न की हो। आधुनिक भारत में ये शब्द ज्यादातर उन लोगों के लिए करते है जो जनता को लूटते है जैसे नेता जो की देश की जनता के धन को अपने कब्जे में करते है , जामखोरों के लिए जो खाने पीने आदि रोजमर्रा की जरूरत के चीजों की कमी कर फिर उन्हें ऊँचे दामों पर बेच कर ज्यादा मुनाफ़ा कमाते है, उन कारखानों के मालिकों के लिए जो गरीब मजदूर से ज्यादा काम ले कर कम पैसा देते है। हमारी इस नए युग में भोगवादी मनोवृति को भ्रष्टाचार की जननी कहा जाता है।
आधुनिक दुनिया में भ्रष्टाचार के अलग अलग रूप होते है और इनके करने के तरीके भी अलग अलग होते है। जैसे दुकानदार अपने सामान में अलग तरीके से मिलावट करते है जैसे कालीमिर्च में पपीते के बीज को मिलाना , दालों में कंकड़ पत्थर और कीड़ा लगी दाल को मिलाना , अब तो मुनाफ़ा कमाने के हद ही हो गयी है लोग चावलों में प्लास्टिक के चावल तक मिलाने लगे है। दूध जो सबके लिए जरुरी है उसमे यूरिया , डिटर्जेंट की मिलावट तक की बात सामने आने लगी है। कुछ नेताओं ने इतनी भ्रष्टाचार की इतनी हद कर रखी है की उन्होंने जानवरों तक का चारा भी नहीं छोड़ा। ये नेता राजनीति में ऐसे पद को अपने नाम करते है जिन पदों से उनको भरपूर फायदा होता है। समाज सेवा , त्याग और देश सेवा जैसे बाते आज के भारत में पुरानी हो गयी है। लोग आज उनलोगो के त्याग और देश सेवा को भूल गए है जिन्होंने अपना सारा जीवन देश के प्रति समर्पित किया था। अपनी जान को देश के लिए कुबान किया था। आज के समय में राजनीति केवल धन कमाने का मध्यम बन गयी है और देश के मंत्री से लेकर नौकर तक सब अपने पद का लाभ कमाते है और जेब भरते है।
भ्रष्टाचार आज के दौर का लाइलाज़ कैंसर बन गया है जैसे कैंसर धीरे धीरे फैल कर पूरे शरीर को ख़तम कर देता है वैसे ही भ्रष्टाचार हमारी देश की व्यवस्था को बीमार कर देश को फिर से ग़ुलाम बना रहा है।
हमारा देश भ्रष्टाचार के मकड़जाल में इस तरह फंस जायेगा इसकी कल्पना तो हमारे देश के उन नेताओं ने भी नहीं कई होगी जिन्होंने कभी इस देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन बलिदान किया था। देश चाहे फिर से गुलाम बन जाए इसकी किसी को परवाह नहीं है। आज हमारे देश से बहुमूल्य प्रतिभाओं का पलायन हो रहा है। आज बड़े बड़े वैज्ञानिक , इंजीनियर , डॉक्टर्स आदि दूसरे देशों में जा रहे है। आज भारत की सैन्य शक्ति की हालत पैसों की कमी के कारण खराब होती जा रही है। देश का रक्षा बजट को बढ़ाने के बजाय घटा दिया है जिसके कारण सेना को अनेको परेशानियों का सामना करना पड़ता है। देश में अनेको विभाग जैसे जल , कृषि , शिक्षा आदि जो इन भ्रष्टाचार का शिकार बन गए है जिनके कारण आम जनता को बहुत परेशानियाँ उठानी पड़ती है।
अब समय आ गया है जागने का और सोचने का कि भ्रष्टाचार को खत्म कैसे किया जाए। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए हमारे सरकार और जनता को इन कदमो को उठाना चाहिए। हमारी सरकार और जनता को मिलकर लोकपाल बनाना चाहिए और इन लोकपालों को देश के हर राज्य और केंद्र शासित राज्यों में नियुक्त करना चाहिए। लोकपाल सीधे देश के राष्टपति के प्रति उत्तरदायी हो। भ्रष्टाचार करने वालो को कठोर से कठोर दंड मिलना चाहिए। हमें भी समझाना होगा की हम भ्रष्टाचार को बढ़ावा न दे यदि हम कोई काम करवाना चाहते है तो उस काम को रिश्वत आदि न देकर करवाने की कोशिश करनी चाहिए। यदि हम किसी भी जगह भ्रष्टाचार होती हुए देखे तो तुरंत उसका विरोध करे।
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