Skip to main content

Posts

Showing posts from March, 2020

बेरोजगारी की समस्या

बेरोजगारी की समस्या  भारत में बेरोजगारी  की समस्या और समाधान  बेरोजगारी की समस्या एक अभिशाप  भारत में बेरोजगारी  क्यों ? बेरोजगारी  एक महाअभिशाप   भारत को स्वतंत्रता बड़ी मुश्किलों  के बाद मिली है और स्वतंत्रता के बाद भारत की ये कोशिश रही है कि  सबको रोजगार मिले परन्तु  भारत एक विकासशील देश है।  यहाँ पर अनेको समस्या देश के विकास में रोड़ा बनी  हुई है।  विकासशील देशो में सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की होती  है।   जैसे जैसे देश प्रगति करता जा रहा है बेरोजगारी के समस्या भी बढ़ रही है। ये समस्या भारत देश में कोढ़  का रोग बन गयी है। बेरोज़गारी  की समस्या देश के माथे पर एक कलंक का टीका  है बेरोजगारी से अभिप्राय है की योग्यता रखने के बाद भी किसी व्यक्ति को रोजगार नहीं मिलता है। भारत में बेरोजगारी कई तरह की पाई जाती है जैसे शिक्षित बेरोजगारी ,अशिक्षित बेरोजगारी ,अल्प  बेरोजगारी ,प्रछन्न बेरोजगारी। शिक्षित बेरोजगारी से अभिप्राय है की लोग पढ़े लिखे और अपने कार्य में कुश...

महंगाई की समस्या

महंगाई की समस्या  भारत देश में महंगाई की समस्या बहुत समस्या है। महंगाई का कारण  उपभोग्ता  वस्तुओं  की कमी या मुद्रास्फीति है। हमारे दैनिक जीवन में आवश्यक वस्तुओं की कमी कई बातों पर निर्भर करती है। इनके कई कारण  हो सकते है जैसे भरी वर्षा ,हिमपात, अल्पवर्षा, आकाल ,तूफ़ान , फसलों का रोग ,विपरीत मौसम ,ओले पड़ना,आदि। इसके आलावा कई कारण  तो ऐसे है जो मानव द्वारा निर्मित होते है। मानव अपने फायदे  के लिए आवशयक वस्तुओं का कृत्रिम अभाव पैदा कर देता है और उन वस्तुओं को ऊँचे दामों पर बेचता है। ऐसा कार्य आमतौर पर बड़े व्यापारी करते है। वे किसी वस्तु की जामखोरी कर के कृत्रिम अभाव  पैदा कर देते है फिर उस वस्तु को जरूरतमंदों को ऊँचे दामों पर बेच कर मुनाफ़ा  कमाते है। महंगाई की समस्या भारत में ही नहीं अपितु पूरे  विश्व में फैली हुई है।  पूरे  विश्व में ज्यादातर सरकारें लोकतांत्रिक सरकारें है जिसके कारण  चुनाव के समय बड़े बड़े व्यापारी बड़े बड़े दलों  को मोटा चंदा देते है और ये व्यापारी महंगाई बढ़ा कर आम जनता से पैसा वसूलती है। सरकारें भी...

भारतीय सिनेमा

भारतीय सिनेमा  भारतीय सिनेमा के सौ  साल  भारतीय सिनेमा ने सौ  साल का अपना सुहाना सफ़र  पूरा कर लिया है।  भारत के सबसे पहली फिल्म 3 मई 1913 को भारतीय फिल्म जगत के पितामह माने  जाने वाले दादा साहब फाल्के द्वारा बनी फिल्म 'राजा हरिश्चन्द्र 'प्रदर्शित हुई थी।  इसी फिल्म ने ही भारतीय फिल्म की नींव रखी थी। आरंभिक दस वर्षों  में केवल 91 फिल्में  ही बनी थी। वर्तमान में फिल्म उद्योग का चेहरा पूरी तरह से बदल गया है। अब तो हरसाल लगभग 1000 से ज्यादा फिल्मों  का निर्माण होता है। पहले के समय में महिलाओं  का फिल्मों  में काम करना बुरा माना जाता था। जब राजा हरिश्चंद फिल्म बनी तो महिला कलाकार की समस्या आई। किसी भी अच्छे परिवार में महिला का काम करना असंभव  था। सालुंके नाम के वेटर ने इस समस्या का समाधान किया ये वेटर स्त्री जैसे लगता था इसलिए तारामती नाम के पात्र को निभाने के लिए इस वेटर को रखा लिया गया। राजा हरिशचंद्र की भूमिका दत्तत्रेय ने की दूसरी महिला पात्र के लिए गणपत शिंदे ने भूमिका अदा  की। हरिश्चंद्र के बेटे की भूमि...

अनुशासन का महत्व

अनुशासन  अनुशासन का महत्व  अनुशासन ही जीवन को प्रगति की और ले जाता है  अनुशासन क्यों ? अनुशासन हमारे जीवन में क्यों आवश्यक है किसी भी व्यक्ति की जीवन में अनुशासन का बहुत महत्व है।  अनुशासन का मतलब परतन्त्र नहीं बल्कि नियमों के अनुसार जीवन को चलाना होता है। अनुशासन का मतलब ही किसी व्यक्ति को समय  परिस्थिति और स्थान के अनुरूप चलना है। बिना अनुशासन के जीवन ऐसा होता है मानो बिना अंकुश के हाथी। केवल अनुशासन ही किसी व्यक्ति को सफ़ल और उच्च दर्जे की जिंदगी दे सकता है।  अनुशासित व्यक्ति ही सफलता की शिखर को छू सकता है। केवल अनुशासन के द्वारा ही हम किसी भी स्थिति को नियंत्रित कर सकते है। किसी सफल व्यक्ति के जीवन का राज ही उसका अनुशासित जीवन है। केवल अनुशासन द्वारा ही हम अपने जीवन में आगे बढ़  कर अपने जीवन के लक्ष्य को पा सकते है।  अनुशासन के ढेरों  उदाहरण हमें प्रकृति से भी मिल जाते है जैसे सूरज का समय पर हमेशा पूरब दिशा में उगना और समय पर पश्चिम दिशा में छिप  जाना। चाँद का समय समय पर  अपनी कला बदलना। चाँद तारों  की अपनी गति...