विज्ञान और मानव जीवन के लाभ और हानि
विज्ञान का मतलब विशेष ज्ञान है जो हमारे जीवन को सरल और आसान बना दे। आज के दौर में विज्ञान इतनी तरक्की कर चुका है कि इस दौर को विज्ञान का का दौर कहना गलत नहीं होगा। हमारी सभी प्रकार की जरुरत पूरा करने में विज्ञान बड़ा हाथ है। चाहे कोई भी क्षेत्र हो जैसे चिकित्सा ,कृषि शिक्षा , व्यापार ,यातायात आदि सभी क्षेत्रों में विज्ञान ने बहुत तरक्की की है और हमारे जीवन को सुख सुविधा से भर दिया है।आज विज्ञान के कारण तीव्रगामी वायुयानों से सारे संसार का चक्कर कुछ ही घंटो में लगा सकते है। अंतरिक्ष यानों द्वारा करोड़ो किलोमीटर की दूरी से ग्रहों , चन्द्रमा, सूरज आदि की गतिविधियों के चित्रों को एकत्रित किया जा सकता है और उन चित्रों की सहायता से अंतरिक्ष की जानकारियों का ज्ञान बढ़ाया जा सकता है। सिनेमा , वीडिओ , कंप्यूटर आदि भी विज्ञान की ही देन है।
चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान की अद्भुत सफलतायें है। आज यंत्रो के सहायता से किसी भी बीमारी का पता लगाकर उसका इलाज किया जा सकता है। आज सफल शल्य चिकित्सा जिसमे मरीज के अंगों को बदल कर उन्हें जीवन दान मिला है। विज्ञान द्वारा डॉक्टर सैकड़ो मील दूर बैठ कर भी मरीजों का इलाज कर सकते है।
विज्ञान का हमारे जीवन में इतना हस्तक्षेप हो चुका है कि हमारा जीवन असंभव हो गया है। सुख साधन की उन्नति के साथ घातक हथियार , परमाणु बमों के अविष्कार जो की क्षण भर में दुनिया ख़तम करने के क्षमता रखते है, का अविष्कार हुआ है। आज संसार के सभी देशों में परमाणु बम बनाने के होड से लगी है जिसका दुष्परिणाम भविष्य में शायद हमें भुगतना पड़े। परमाणु बम हमले के दुष्परिणाम की मिसाल जापान है जहाँ सालो बाद भी वह विनाश की सजा को भुगत रहा है। आज हमें चाहे कितनी भी दूर जाना हो वाहन का इस्तेमाल करते है , जो काम हम पहले हाथ से करते थे वो मशीनों से करते है जिसके कारण हमारा शरीर का श्रम कम होता है जिसके कारण अनेको बीमारियों के शिकार हो जाते है। बच्चे हो या बड़े अपना ज्यादातर समय मोबाइल और टी.वी के आगे बिताते है जिसके कारण शरीर के विकास में बाधा आती है और धूप , ताजी हवा आदि से से दूर हो जाते है जो की हानिकारक है। वर्तमान समय में विज्ञान का दुरुपयोग बढ़ गया है। आज खाने पीने की चीजों का कृत्रिम रूप बनाकर बेचा जा रहा है , कृषि में रसायनो का जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे है , जरुरत से ज्यादा वाहनों को चला कर हवा को प्रदूषित किया जा रहा है आदि कार्यकल्पों द्वारा हमें अपने सरल जीवन को कठिन बना रहे है जिसका परिणाम जैसे पृथ्वी का तापमान का बढ़ना , वर्षा में कमी , प्राकृतिक आपदाओं का ज्यादा होना आदि हम भुगत रहे है। मशीनी जीवन ने मानव के नैतिक मूल्यों का हनन किया है। ऐसी अवस्था में मनुष्य का विवेक ही उसे सतर्कता से विज्ञान के सदुपयोग की और प्रेरित कर सकता है और इसके अभिशापित भाग से छुटकारा दिला सकता है।
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